एक नयी उम्र मांग के लायी हूँ मैं वापिस
एक और सांज तेरे साथ गुज़ारने आयी थी मैं हाफ़िज़,
कुछ चंद आरज़ू में निकल गए
कुछ तेरे इंतज़ार में,
रेहम थोड़ी कर- तेरे जाने के बाद कल तू फिर चला आएगा
मैं चल गयी तो मेरा खोया वक़्त फिर कहा आएगा।
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