तुम कहते नहीं पर मुझपे मरते ज़रूर हो
तुम थकते नहीं पर मुझे ख्वाबो में देखने को थोड़ी देर सोते जरूर हो,
तुम्हारे होठों पे सजी इबादत में, मैं हूँ
तुम्हारे सीने में छिपी वो सुकून की चाह में, मैं हूँ,
तुम कहते नहीं पर रातो से नफरत तुम्हे भी हैं
तुम कहते नहीं यार, पर मेरी वो हर अनकही बात से प्यार तुम्हे भी है।
Read more: सूरज से गुफ्तगू #15



Leave a reply to radhikasreflection Cancel reply