पाना नहीं सिर्फ चाहना है तुजे कुछ ज्यादा नहीं सिर्फ सपनो में देख लेना तू मुझे, और कुछ नहीं तो बसा लेना तेरी हर रंगीन अंगड़ाई में फिर तू चाहे तो बस बन कर रह जाउंगी तेरी ही परछाई मै। Read more: सूरज से गुफ्तगू #21
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10 responses to “सूरज से गुफ्तगू #22”
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