वो कहते है वक़्त बड़ा तेज़ हैं
शायद उन्होंने कभी सारी रात उस चाँद को नहीं देखा हैं
शायद उन्होंने अकेले में बिस्तर पर सिलवटों को नहीं सजाया हैं
शायद, शायद उन्होंने उन तारो को तांकते हुए तुम्हारा इंतज़ार नहीं किया हैं
Read More: सूरज से गुफ्तगू #31

वो कहते है वक़्त बड़ा तेज़ हैं
शायद उन्होंने कभी सारी रात उस चाँद को नहीं देखा हैं
शायद उन्होंने अकेले में बिस्तर पर सिलवटों को नहीं सजाया हैं
शायद, शायद उन्होंने उन तारो को तांकते हुए तुम्हारा इंतज़ार नहीं किया हैं
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