मुद्दतो बाद एक पैगाम आया है
भरी दोपहर में मेरे चाहने वाले का ऐलान आया है
डर है कही वो फिर न मुकर जाये
इतनी दफा छोड़ गया, वैसे कही फिर न छोड़ जाये.
Read More: सूरज से गुफ्तगू #47

मुद्दतो बाद एक पैगाम आया है
भरी दोपहर में मेरे चाहने वाले का ऐलान आया है
डर है कही वो फिर न मुकर जाये
इतनी दफा छोड़ गया, वैसे कही फिर न छोड़ जाये.
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Badhiya👏👏👏
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Kya baat hai 👏
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