न नगमे न सपने
न तेरा न मेरा
चल बीच राह ही कही मिलते है
जी जान से नहीं बस उन ढाई हर्फो को निभाते है
मुश्किल सही नामुमकिन तो नहीं
हसना और रोना भी पर तेरा साथ तो सही
अब कोई कहानी तेरी छुपी नहीं
मेरे पंख अब मोम के नहीं
न अब कोई इंतज़ार है, न सितारों को पाने की चाहत
है तो बस तेरा साथ और सिर्फ तेरी ही मोहब्बत
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PS: With this I close this chapter here. Thank you once again for reading these insane musings of mine, throughout and sharing your thoughts on them. I owe you, for sticking with me. See you next year. Love.



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