
अब तक उलझी हु अपने सवालो में
दो-चार सवाल तू भी पूछ ले,
शायद कुछ सुलझ जाये
बंधी घुटन की डोर, शायद टूट जाये.


अब तक उलझी हु अपने सवालो में
दो-चार सवाल तू भी पूछ ले,
शायद कुछ सुलझ जाये
बंधी घुटन की डोर, शायद टूट जाये.
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