
तू ढूंढ रहा है कुछ
ऐसा सुना है मैंने
तू खो चूका है कुछ
ऐसा पता लगा है मुझे.
अधूरा अधूरा सा लग रहा होगा न
जैसे मुझे अब तक लगता था
आज तक तूने कहा था
चल आज मै तुजसे वही बात कहती हूँ
नहीं पायेगा मुझे
जब तक मिश्री सा घुल नहीं जाता तू मुजमे
नहीं खोज पायेगा मुझे
जब तक नहीं खो जाता तू, मुजमे.
कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू #11



Leave a reply to SinghJyoti Cancel reply