मै कुछ देर का मेहमान हु
तू जीता चला जायेगा
तूने ही कहा था, मै जरूरी हु सांस लेने के लिए
फिर तू क्या करेगा, मेरे बाद मुझे पाने के लिए?
चल, तुजे क्या करना है मै ही तुजे बता देती हूँ
तेरे हर हाल का पता मै ही लिख के लती हूँ
तू क्या मेरे लिए नग्मे लिखेगा
मेरी यादो से खुद को कितना बिखेरेगा
मै उस मिटटी में सिमटती चली जाउंगी
तू उस अम्बर पे हमेशा उड़ता चला जायेगा
इश्क़ में मै, ढलती चली जाउंगी
उसी इश्क़ में तू भी डूबता चला जायेग।
Read More: सूरज से गुफ्तगू #23


Come say hi, and drop a comment