खुदको समजा लिया है
तुझको मना लिया है
इकरस जितना ऊंचा नहीं उड़ेंगे
हम दोनों जितना बटोर सके उसी में खुश हो लेंगे
ज्यादा ख्वाहिशे नहीं रखेंगे
वरना शायद दो जिस्म एक जान जैसा कुछ खो देंग।
Read More: सूरज से गुफ्तगू #24

खुदको समजा लिया है
तुझको मना लिया है
इकरस जितना ऊंचा नहीं उड़ेंगे
हम दोनों जितना बटोर सके उसी में खुश हो लेंगे
ज्यादा ख्वाहिशे नहीं रखेंगे
वरना शायद दो जिस्म एक जान जैसा कुछ खो देंग।
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It’s beautiful. Does love survive?
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