न देखु तुजे
तो ज़िंदा ही रहती हूँ
न देखु तुजे
तो वफ़ात से न मिल पति हूँ
न देखु तुजे
तो उन गैरो में भी तुजे ही ढूंढ़ती हूँ
न देखु तुजे
तो बस गुमसुम सी रहती हूँ
न देखु तुजे
तो शोर में भी ख़ामोशी ढूंढ़ती हूँ
अब क्या बताऊ न देखु तुजे
तो किसी बात का गम नहीं होता
पर जो न देखु तुजे
तो मेरी किसी मुस्कराहट का भी कोई अस्तित्व नहीं होत।
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