तेरे कंधे पर सर रख कर रोना चाहती हूँ
तुजे बाहो में भर कर कुछ देर सोना चाहती हूँ
फिर जल के राख हो जाऊं तो भी कोई गम नहीं
बस तेरे सीने में भी खुद की पहचान छोड़ना चाहती हूँ
तेरी उंगलियों के बीच खुद की उंगलियां पिरोना चाहती हूँ
तेरे सपनो में मेरी जान, खुद के सपनो को पिरोना चाहती हूँ
मोहब्बत की है हमने ये बेख़ौफ़ कहते है
अब तेरी मोहब्बत का इकरार भी नग्मों में सुनना चाहती हूँ
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