उसने कहा हम मिले नहीं
फिर जुदाई का गम कैसे
उसे क्या पता, हम मिले नहीं
फिर भी मोहब्बत थी उससे
पाया तो नहीं
पर अब तक ढूंढ रही हूँ
उस एक तिनके सी मुलाकात
अब तक महसूस कर रही हूँ
बादलो और फूलो पर चल कर नहीं
कांटो और अंगारो से भी लड़ कर आयी हूँ
वो सारी पुरानी बातें
इन सन्नाटो में छुपा कर लायी हूँ
उसके रस्मो रिवाजो का तो पता नहीं
पर हमारे यहाँ कोई खाली हाथ तो वापस जाता नहीं
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